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साथ गुजारे लम्हे..

यादें नहीं है वो लम्हे, धड़कन है मेरे जज्बातों की..
याद तुम्हें भी है क्या वैसे ही बातें बीती बातों की..
साथ तुम्हारे जो गुजरे वो लम्हे अब भी वैसे ही है
साँसों के आने जाने में वो लम्हे अब भी ठहरे ही है..
उन लम्हों को जीने फिर से, साथ मेरे तुम आओगे क्या
साथ गुजारे सारे लम्हे फिर से वैसे दोहराओगे क्या..
वो बीते लम्हे, नींव बनेंगे प्रेम महल के सोचा न था
हम तुम ऐसे मनमीत बनेंगे ये भी तो सोचा न था
कितना कुछ है कहा, अनकहा उन लम्हो की बातों में..
कितना कुछ है सुना अनसुना उन प्रेम पगे जज्बातों में..
उन सारे जज्बातों के किस्से बुनने, साथ मेरे तुम आओगे क्या
उन साथ गुजारे लम्हो सुधियाँ, तुम भी कभी दोहराओगे क्या..

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