सोचिए जिस सपने को साकार करने के लिए आपने सर्वस्व लगा दिया हो। संघर्षों भरी जिंदगी में आपकी उम्मीद सिर्फ वही हो, पूरी दुनिया से लड़कर आपने उस सपने को पूरा करने के लिए जी-जान लगाया हो लेकिन जब वही साकार हुआ सपने आपकी लिए ऐसा नासूर जख्म बन जाए जिसे न छुपा सकते हैं न जता। तब आपके पास क्या रास्ता बचता है। आप किसी से जाहिर नहीं कर सकते क्योंकि उसे आपने चुना था। आपका ही सपना था। आप गुस्सा नहीं कर सकते क्योंकि उसके आंसुओं में इतनी ताकत है तुम्हारा गुस्सा कोई मतलब नहीं रखता। गलती किसी की भी हो लेकिन अब गलत सिर्फ तुम हो। क्योंकि जिम्मेदारी तुम्हारी थी। पता नहीं क्यों पीड़ित हमेशा लड़कियों को ही कहा जाता है क्या लड़के कभी प्रताड़ित नहीं होते। क्या अच्छा होने की इतनी बड़ी सजा होती है कि तुम्हें हमेशा चुप्पी साधे रहना पड़ता है। एक लड़का भी अपने घर से अलग रहता है, बिल्कुल अपनी पत्नी की तरह। उस पर अपने घर की जिम्मेदारियां हैं। जिसे वो दिनरात मेहनत करके पूरा करता है। वो सब जगह कंप्रोमाइज करता है। बस इसलिए क्योंकि वो एक लड़का है। वो रो नहीं सकता। क्योंकि वो एक लड़का है। वो गुस्सा नहीं हो सकत...