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मैं कुछ यादें, अहसास लेकर जा रहा हूं तुम चलोगी क्या।

मैं कुछ यादें, अहसास लेकर जा रहा हूं तुम चलोगी क्या।
कुछ खास नहीं है साथ मेरे, बस मुझमें तुम्हें ले चलता हूं
कुछ तेरे मेरे प्यार के हिस्से, कुछ मोहब्बत के किस्से
कुछ अपना सा कुछ पराया सा संसार साथ ले चलता हूं
मैं कुछ यादें, कुछ अहसास लेकर जा रहा हूं तुम चलोगी क्या
ये जो अल्फाज है जज्बातों के सामने बौने से हैं
बहुत कुछ है कहने को पर बताने की भी सीमाएं हैं
मैं जानता हूं तुम मुझ मुझसे ज्यादा समझती हो
फिर भी प्यार की इंतहा बताने जा रहा हूं तुम चलोगी क्या
चल झूठे कहीं के जब कहती हों न तो सच पर भरोसा बढ़ जाता है
तुम्हारा रूठना, आंखे चुराना तुममे कहीं ठहर सा जाता है
सब साफ है फिर भी मुझे कुछ धुंधला सा लगता है
दिल की सफाई को जा रहा हूं तुम चलोगी क्या
बेइंतहा मोहब्बत नहीं तुम हो मुझमें
उस अनंत, असंख्य जज्जबात मैं गिनने जा रहा हूं
कुछ यादें, कुछ अहसास लेकर जा रहा हूं चलोगी क्या
ये बस सफर है मैंने मंजिल का पता नहीं किया है
पहुंचना कहां है क्यों है इन सवालों के जबाव भी नहीं हैं
सवालों को सवालों से समझाने के लिए कहीं मैं जा रहा हूं
कुछ यादें, कुछ अहसास लेकर जा रहा हूं चलोगी क्या




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