किसी ने कहा कि वो सिर्फ दौड़ रहा है पर पहुँच नहीं रहा.. पाने की कोशिश तो जारी है पर वह तलाश ख़त्म नहीं करना चाहता... उसे प्यार का प्रतिकार समझ नहीं आता.. पर फिर भी उसे वो स्वीकार्य भी नहीं है... और वो उलझता जाता है स्वयं ही स्व के मंथन में...
परंतु ये स्तिथि समझ के परे नहीं है मेरे जानते हो क्यूँ??? क्यूंकि ऐसा होना तो स्वाभाविक है न, पपीहा पक्षी को जानते हो न, कहते है सिर्फ स्वाति नक्षत्र में होने वाली बारिश से अपनी प्यास बुझाता है वो... सोचो सारे वर्ष आसमां की और नजरे गड़ाये चिल्लाता रहता है और इंतज़ार करता है बारिश की उन बूंदों का.. वो बारिश की चंद बूंदे उसके जीवन की सबसे अनमोल बूंदे है क्योंकि उन्हें पाना उसके लिए आसान नहीं होता, अब जरा सोचो हर बार बरसने वाली बूंदे अगर उसी स्वाति नक्षत्र में बरसने वाली बूंदे बन जाये तो क्या खास रह जायेगा उन बूंदों में, न वो उतनी अनमोल रह जाएँगी और न ही उनका इंतज़ार इतना अधिक रह जायेगा... हमारा मन भी बिलकुल उसी पपीहे की भांति है और प्रेम स्वाति नक्षत्र की वो बारिश जो अनमोल है उसके लिए, पर तब तक जब तक उसका इंतज़ार अधिक हो... जब उसे ये अहसास हो जाये की अब उसके जीवन में आने वाली हर बारिश उसी नक्षत्र की है तो वो व्याकुल हो उठता है व्यथित हो जाता है इसलिए नहीं की उसे प्रसन्नता नहीं है उस बारिश को पा लेने की बल्कि इसलिये कि उसके जीवन में उन बूंदों का इंतज़ार बहुत अहम था जीवन का एक अभिन्न अंग था ये इंतज़ार.. और उस इंतज़ार को अपने जीवन से यूँ निकाल फेंकना स्वीकार्य नहीं कर पाता हमारा हृदय.... और शुरू हो जाता है एक मंथन स्वीकार्य और प्रतिकार के मध्य, ये प्रतिकार प्रेम का नहीं है वरन है तो इंतज़ार के ख़त्म होने का... पर जानते हो प्रेम बारिश नहीं है वो भिगोता नहीं है न ही प्यास बुझाता है प्रेम अमृत है जो तुम में मिलकर तुम्हें हर बंधन से मुक्त से कर तुम में अमरत्व घोल देता है.. इसमें भीगने की कोशिश मत करना कभी, न बहने की, न डूबने की.. और जब ये तमाम चेष्टाएँ समाप्त हो जाएंगी तो हृदय का हर भय भी समाप्त हो जायेगा, भय उसके इंतज़ार के दूर होने का, भय उन अनमोल बूंदों के सामान्य होने का, और तब समाप्त हो जायेंगे सारे प्रतिकार.. क्यूँकि तब प्रेम में भीगना नहीं वरन प्रेम में घुल जाना उस अमृतत्व में मिल जाना ही होगा उद्देश्य... ठीक वैसे ही जैसे स्वाति नक्षत्र की बूंदों के इंतज़ार में आसमान को टकटकी लगाए किसी पपीहे की आँखे सदा के लिये बस खुली रह जाएं और वो हो जाये शून्य में विलीन अपने जीवन के एकमात्र उद्देश्य (इंतज़ार)के साथ....
कुछ जज्बात जो दिल की गहराइयों में दफ़न हों कभी कभी लफ्जों में बयां हो ही जाते है ऐसेही कभी बातो बातों में किसी ने पुछा था कि रिश्ता है क्या हमारे बीच.. तब दिल के जज़्बात जबाँ पर तो...
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