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वक्त-वक्त की बात है










मैं गिरा हूं, ठहरा हूं...
थका नहीं, हारा नहीं.
फिर उठूंगा..उड़ूंगा
अब दौड़ना लक्ष्य नहीं है
उड़ना है मुझे बहुत ऊपर
असफलता ने जिद पैदा की है
सफलता को लपेटना की
इंतजार कीजिए
सवालों के जवाब भी मिंलेगें
कुछ चेहरों पर हंसी बिखरेगी
कुछ की हंसी उड़ भी जाएगी
खैर, वक्त है वक्त का क्या है
सब वक्त वक्त बात जो है  


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